विष्णुपद मंदिर गया जी का सबसे प्रमुख और पवित्र मंदिर है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के चरणों के अंकित चिह्न हैं, जिन्हें "विष्णुपद" कहा जाता है। यहाँ पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विष्णुपद मंदिर में किया गया पिंडदान अक्षय फलदायी माना जाता है। यहाँ पितरों के नाम से दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।
फल्गु नदी गया जी की पवित्र नदी है। यहाँ तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस नदी में तर्पण करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है।
फल्गु नदी में तर्पण करने से सात पीढ़ियों के पितरों को तृप्ति मिलती है। यह नदी गंगा की तरह पवित्र मानी जाती है।
अक्षयवट एक प्राचीन बरगद का वृक्ष है जो कभी नष्ट नहीं होता। इस वृक्ष के नीचे पिंडदान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि यहाँ का पिंडदान अक्षय पुण्य देता है।
अक्षयवट के नीचे किया गया पिंडदान अक्षय फलदायी है। यहाँ पितरों के नाम से दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।
प्रेतशिला एक पवित्र पहाड़ी है जहाँ प्रेत यoni से मुक्ति हेतु पूजा की जाती है। यहाँ नारायण बली पूजा का विशेष महत्व है।
प्रेतशिला पर नारायण बली पूजा करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त आत्माओं को मुक्ति मिलती है और पितृ दोष का निवारण होता है।
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